Mahatma Gandhi Week Celebrations

चम्पारण सत्याग्रह के सौ वर्ष और गाँधी जी की जयंती का यह वर्ष जीवन में पर्वों की तरह ही महत्त्व रखता है। राष्ट्रीय पर्व के रूप  में मनाया गया यह दिवस विद्यालय के लिए गौरवपूर्ण रहा। हात्मा, बापू, युगप्रवर्तक, युगपुरुष, युगद्रष्टा आदि विषेषण उस चेतना पुरुष के लिए कम पड़ जाते हैं जिन्होंने हमें सत्य एवं अहिंसा का वह शस्त्र दिया जिसके आगे ब्रिटीश साम्राज्य को भी घुटने टेकने पड़े।आज का यह कार्यक्रम कक्षा पाँचवीं के छात्रों ने ‘डांडी यात्रा ’ से आरंभ किया। दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति, नमक आंदोलन की विषेश चर्चा की। महात्मा गाँधी की भूमिका पाँचवीं ‘ई‘ के छात्र श्रीकर मिश्रा निभा रहे थे। दांडी यात्रा कर रहे लोगों ने गाँधी से कई सवाल किए। जिनमें उनके अपने जन्मदिन पर घी के दीए जलाना बिल्कुल पसंद क्यों नहीं था ? आंदोलन के लिए एक चुटकी नमक को ही क्यों चुना ? आदि ।अपने भाषण के दौरान सीनियर विंग के छात्रों ने राष्ट्रीय आंदोलन, अछूतोद्धार, स्त्री शिक्षा आदि विषयों को स्मरण किया। उनके विचारों को भारत-भूमि सदा याद रखेगी, विचार रखे।

प्रतिभागियों के लिए प्लाजा के बीच में गोलाकार स्थान छोड़े गए थे। स्थान के चरों ओर सबों के बैठने की व्यवस्था थी।  समस्त छात्र, शिक्षक, कर्मचारी, प्रधानाध्यापिका एवं प्राचार्य ने गाँधी जी के प्रिय भजन वैष्णव जन तै तेन, रघुपति राघव, वह अमरगीत का गायक आदि गाए। छात्र, संगीत विभाग के शिक्षकगण एवं कर्मयोगियों ने उनको याद कर अपने गायन से सबों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चम्पारण गीत- तीन कठिया नील खेती, दे दी हमें आजादी आदि गीतों को गाकर उपस्थित सभी लोगों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के अंत में  प्राचार्य ने गाँधीवाद, दर्शन आदि पर विषेष चर्चा की एवं उनके मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने हेतु हिंदी में शपथ दिलाई। अपने पुराने इतिहास को याद करके सबों ने साथ प्रण लिए कि जिस स्वतंत्रता को पाने के लिए हमारे क्रांतिकारियों और नेताओं ने अपने जीवन अर्पित कर दिए, हमें किसी भी कीमत पर उसे बचाना है। हमें यह ध्यान रखना है कि देश की स्वतंत्रता से ही अस्मिता जुड़ी है। यह जयंती हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।

Added on: 02 Oct 2017

Published by: School Admin